मेरे नदीम मेरे हमसफ़र, उदास ना हो
कठिन सही तेरी मंजिल, मगर उदास ना हो
कदम कदम पे चट्टानें खड़ी हैं, लेकिन
जो चल निकलते हैं दरिया तो फिर नहीं रूकते
हवाएँ कितनी भी टकराएँ आंधियाँ बनकर
मगर घटाओं के परछम कभी नहीं झुकते
मेरे नदीम .........................................
हर एक तलाश के रास्ते में मुश्किलें हैं
मगर हर एक तलाश मुरादों के रंग लाती हैं
हजारों चाँद सितारों का खून होता हैं
तब एक सुबह फिजाओं पर मुस्कराती हैं
मेरे नदीम ......................................
जो अपने खून को पानी बना नहीं सकते
वो जिन्दगी में नया रंग ला नहीं सकते
जो रास्ते के अंधेरों से हार जातें हैं
वो मंजिलों के उजालों को पा नहीं सकते
मेरे नदीम.......................
?????
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it is written by great sahir ludhiyanvi
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