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Friday, November 11, 2011

अग्निपथ.......हरिवंश राय बच्चन


वृक्ष हो भले खड़े,

हो घने, हो बड़े,

एक पतरा छा भी,

मांग मत, मांग मत , मांग मत

अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ

तू न थकेगा कभी,

तू न थमेगा कभी,

तू न मुड़ेगा कभी,

कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ

अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ

यह महान दृश्य है,चल रहा मनुष्य है,

अश्रु, श्वेत, रक्त से,

लथपत, लथपत, लथपत

अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ

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